काल सर्प दोष शांति

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काल सर्प दोष शांति

कालसर्प योग की कुण्डली धारण करने वाले जातक का भाग्य प्रवाह राहु-केतु अवरूद्ध करते है, इस कारण जातक की उन्नति नही होती। उसे कामकाज नही मिलता। कामकाज मिल भी जाए तो उसमें अनन्त अड़चने उपस्थित होती है। परिणामस्वरूप उसे अपनी जीवनचर्या चलाना मुश्किल हो जाता है। उसका विवाह नही होता, यदि हो भी जाए, तो संतान सुख में बाधा आती है। वैवाहिक जीवन में कटुता आकर अलगाव रहता है। कर्ज का बोझ उसके कंधो पर होता है। और उसे अनेक प्रकार के दुख भोगने पड़ते है। अक्सर कालसर्प से ग्रसित जातक नकारात्मकता और हीन भावना की ओर अग्रसर हो जाते हैं। जाने अनजाने मे किये गए या हुए कर्मो के फलस्वरूप दुर्भाग्य का जन्म होता है।

दुर्भाग्य चार प्रकार के होते हैः-

पहला दुर्भाग्यः शारीरिक हीनता एवं मानसिक दुर्बलता के कारण निराशा कि भावना जागृत होना। वह अपने जीवित शरीर का बोझ ढोते हुए शीघ्रातिशीघ्र मृत्यु प्राप्त करना चाहता है।

दुसरा दुर्भाग्यः कठोर परिश्रम फल नही मिलना, धन के लिए तरसना है।

तीसरा दुर्भाग्यःकुलक्षणी एवं कलहप्रिय पति या पत्नी का मिलना है।

चैथा दुर्भाग्यः संतान द्वारा कष्ट के रूप में प्रकट होता है।

कालसर्प योग तब होता है जब जन्म के समय किसी व्यक्ति की कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के मध्य स्थित होते हैं। प्राचीन विद्वानो ने 12 प्रकार के कालसर्प योगो का विश्लेषण किया है। जो जन्म कुण्डली मे अपना अलग-अलग प्रभाव दिखाते है।

काल सर्प के प्रकारः

  • प्रथम भाव मे राहु होने से अनंत कालसर्प योग बनता है।
  • द्वितीय भाव मे राहु होने से कुलिक कालसर्प योग बनता है।
  • तृतीय भाव मे राहु होने से वासुकी कालसर्प योग बनता है।
  • चतुर्थ भाव मे राहु होने से शंखपाल कालसर्प योग बनता है।
  • पंचम भाव मे राहु होने से पद्म कालसर्प योग बनता है।
  • षष्टम भाव मे राहु होने से महापद्म कालसर्प योग बनता है।
  • सप्तम भाव मे राहु होने से तक्षक कालसर्प योग बनता है।
  • अष्टम भाव मे राहु होने से कर्कोटक कालसर्प योग बनता है।
  • नवम भाव मे राहु होने से शंखचूड कालसर्प योग बनता है।
  • दसम भाव मे राहु होने से घातक कालसर्प योग बनता है।
  • एकादश भाव मे राहु होने से विषधर कालसर्प योग बनता है।
  • बारहवें भाव मे राहु होने से शेषनाग कालसर्प योग बनता है।

इस योग के प्रभाव में व्यक्ति कष्ट और दुर्भाग्य का जीवन व्यतीत करता है। यदि यह अत्यधिक पीड़ित है तो यह योग किसी के चार्ट के सभी अच्छे योगों को रद्द करने की क्षमता रखता है। हमारे विद्ववान पंण्डितो द्वारा विधि- विधान से की जाने वाली यह पूजा बहुत ही प्रभावशाली होती है और कुछ ही हफ्तों में परिणाम दिखने लगता है।

कालसर्प योग पूजा के लिए निर्देश:

  • कालसर्प योग की पूजा 1 दिन में पूरी होती है।
  • लोगों को पूजा स्थल पर एक दिन पहले अवश्य आना चाहिए।
  • कृपया अपने साथ नए सफेद कपड़े धोतीए गमछाए रुमाल और अपनी पत्नी के लिए साड़ीए ब्लाउज आदि ;काले या हरे रंग के अलावाद्ध लाएँ।
  • इस अनुष्ठान के लिए आरक्षण कम से कम 4 दिन पहले हमें फोन या मेल द्वारा सूचित करके किया जाना चाहिए।

कालसर्प शांति करने से 12 विभिन्न प्रकार के सांपों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कालसर्प शांति पूजा के साथ राहु और केतु पूजा सफलता के द्वार खोलती है। नाग की सोने की मूर्ति की पूजा करने से देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। कमाया हुआ धन सही उद्देश्य के लिए खर्च किया जाता है। मन से अज्ञात भय दूर हो जाता है। मन शांत होता है और व्यक्ति सकारात्मक तरीके से सोचने लगता है। समाज में मान सम्मान मिलता है और पेशेवर जीवन में भी सफलता मिलती है। पारिवारिक संबंध अच्छे और मजबूत होते हैं।

कालसर्प शांति पूजा व्यक्ति को बुरी शक्तियों और ऊर्जाओं से बचाती है। परिवार में अपने माता.पिता और बुजुर्ग लोगों की सेवा करने का अवसर मिलता है। इनकी पूजा करने से सर्प का भय दूर हो जाता है। व्यक्ति को बुरे प्रभाव से मुक्ति मिलती है। कालसर्प शांति पूजा करने से अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होता है। इस पूजा से व्यक्ति को जीवन में सफलता प्राप्त होती है।

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